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अब मकर संक्रांति से दर्शन देंगे भगवान आदि बदरीनाथ

Now Lord Adi Badrinath will give darshan from Makar Sankranti

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अब मकर संक्रांति से दर्शन देंगे भगवान आदि बदरीनाथ

पौष कृष्ण एकादशी पर 15 दिसंबर को शाम 7:30 बजे बंद किये गए मंदिर के कपाट, परंपरा के अनुसार एक माह के लिए पौष में बंद रहते हैं कपाट

देहरादून, 15 दिसंबर 2025: अष्ट बदरी में प्रथम आदि बदरीनाथ धाम के कपाट सोमवार शाम 7:30 बजे एक माह के लिए बंद कर दिए गए। लोक परंपरा के अनुसार अब मकर संक्रांति पर्व पर 14 जनवरी 2026 को धाम के कपाट खोले जाएंगे। कपाट बंद होने के मौके पर समीपवर्ती गांवों से सैकड़ों की संख्या में आदि बदरी पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान नारायण के निर्वाण दर्शन किए।

चमोली जिले में कर्णप्रयाग-रानीखेत राजमार्ग पर स्थित आदि बदरीनाथ मंदिर समूह में कपाट बंद करने की तैयारियां ब्रह्ममुहूर्त में शुरू हो गई थीं। इसके तहत भगवान आदि बदरीनाथ के विग्रह को वसुधारा जल प्रपात और सप्त सिंधु के जल से स्नान कराया गया। इसके बाद मंदिर के पुजारी ने भगवान नारायण का शृंगार किया और पंचज्वाला आरती के बाद भगवान नारायण को सामूहिक कड़ाह भोग लगाया गया। शाम को भगवान नारायण के विग्रह से पीत वस्त्र, क्रीट, कुंडल व छत्र उतार कर उन्हें निर्वाण स्वरूप प्रदान करने के बाद घृत कंबल ओढ़ाया गया और तय मुहूर्त पर धाम के कपाट बंद कर दिये गए।

इससे पूर्व, मंदिर समिति के अध्यक्ष जगदीश बहुगुणा ने मुख्य अतिथि को आदि बदरी मंदिर समूह का चित्र व स्मृति चिह्न भेंट किया। इस अवसर पर विजय चमोला, मंदिर समिति के उपाध्यक्ष पुष्कर रावत, महासचिव हिमेंद्र कुंवर, कोषाध्यक्ष बलवंत भंडारी, गंगा रावत, यशवंत भंडारी, कैप्टन गैंणा सिंह, नरेश बरमोला आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं और महिला मंगल दलों ने सरस्वती वंदना, कथक, पांडव नृत्य, भजन आदि की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं।

विदित हो कि आदि बदरी धाम गढ़वाल मंडल का सबसे बड़ा मंदिर समूह है। यहां आठवीं सदी के 16 मंदिर हैं।   यहां से आधा किमी की दूरी पर गढ़वाल राजवंश की राजधानी रही चांदपुरगढ़ी है। कर्णप्रयाग क्षेत्र में ही प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बेनीताल भी है।

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