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संघर्ष की जीत है मारिया को मिला नोबेल सम्मान
Maria received the Nobel Prize, a victory of struggle.

संघर्ष की जीत है मारिया को मिला नोबेल सम्मान

रजनी चंदर, ओस्लो (नॉर्वे), 10 अक्टूबर 2025:
मारिया कोरीना माचादो ( María Corina Machado) वह शख्शियत हैं, जिन्हें इस बार शांति के लिए दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार-2025 से नवाजा गया है। जरा जान लें कि मारिया कोरीना माचादो आखिर हैं कौन। उन्होंने ऐसा क्या किया, जो नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने पुरस्कार के लिए उनके नाम का चयन किया।

काराकास (वेनेज़ुएला) में सात अक्टूबर 1967 को जन्मीं मारिया चार बहनों में सबसे बड़ी हैं। वह एक ऐसे परिवार से आती हैं, जिसकी व्यावसायिक, बौद्धिक और नागरिक जड़ें गहरी हैं। मारिया के पिता, एनरिके माचादो ज़ुलोआगा, एक प्रमुख इस्पात व्यवसायी थे। जबकि उनकी माँ, कोरीना पारिस्का, एक मनोवैज्ञानिक हैं। उनके परिवार के इतिहास में ऐसे पूर्वज शामिल हैं, जो उद्योग, साहित्य और तानाशाही के विरुद्ध प्रतिरोध आंदोलनों में सक्रिय रहे।
मारिया का बचपन कारावास में बीता, जहां वे अपने परिवार की उस विरासत से घिरी थीं, जिसमें वेनेज़ुएला के इतिहास में योगदान देने वाले कई नोबेल लेखक, नागरिक, नेता और स्वतंत्रता के संघर्ष में जुड़े लोग शामिल थे । उनके पारिवारिक संबंध सेबास्तियान जोसे एंटोनियो रोड्रिग्ज़ डेल टोरो वाई अस्कानियो और एडुआर्डो ब्लांको जैसे प्रसिद्ध व्यक्तियों से भी जुड़े हैं।
काराकास स्थित आंद्रेस बेलो कैथोलिक यूनिवर्सिटी (Universidad Católica Andrés Bello) से औद्योगिक अभियांत्रिकी की पढ़ाई पूरी करने के बाद मारिया ने वेनेज़ुएला के प्रमुख बिजनेस स्कूल Instituto de Estudios Superiores de Administración (IESA) से वित्त में मास्टर डिग्री हासिल की। वर्ष 2009 में मटिया को येल यूनिवर्सिटी के Yale World Fellows Program के लिए चुना गया, जिसने उनके अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण और नेतृत्व विकास को और मजबूत किया।




