धर्म-परम्पराएं

अभी भी चारधाम की राह आसान नहीं, परीक्षा लेती रहेंगी चुनोतियां

The path to Char Dham is still not easy

खबर को सुनें


आसान नहीं अभी भी चारधाम की राह, परीक्षा लेती रहेंगी चुनोतियां

———————————————
देहरादून, 08 सितंबर 2025: उत्तराखंड ह8मलएचारधाम यात्रा के दूसरे चरण में भी मौसम की चुनौतियां कम होती नजर नहीं आ रहीं। वर्षाकाल पहाड़ इस कदर हिल चुका है कि भूस्खलन, भूधंसाव व भूकटाव थमने का नाम नहीं ले रहा। बादल अभी भी फट रहा है और हाईवे व पैदल यात्रा मार्गों पर पत्थर लगातार गिर रहे हैं। हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि 15 सितंबर से चारधाम यात्रा फिर गति पकड़ लेगी, लेकिन हालात देखकर लगता नहीं कि ऐसा संभव हो पायेगा। जबकि चारधाम के कपाट बंद होने में अब बामुश्किल डेढ़ माह का समय बचा है।
ठीक है कि छह सितंबर से बदरीनाथ व केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू हो चुकी है और यात्री भी ठीकठाक संख्या में पहुंचने लगे हैं, लेकिन गंगोत्री और यमुनोत्री में भी अगले कुछ दिनों में ऐसा ही दृश्य देखने को मिलेगा, यह दावा करने की स्थिति में कोई नहीं है। कारण, धराली आपदा के बाद गंगोत्री-यमुनोत्री हाईवे बेहद खतरनाक हो गए है। हर्षिल और धराली के बीच भागीरथी नदी और स्यानाचट्टी में यमुना नदी पर बनी झील ने हाईवे को काफी कनहीं पAदेनामजोर कर दिया है और वह जगह-जगह धंस रहा है।विशेषकर यमुनोत्री हाईवे का फिलहाल संकट का पर्याय बना हुआ है। दोनों ही धाम में पिछले कई दिनों से एक भी यात्री के कदम नन्हीं पड़े।
——————————

जो होगा, मौसम की मेहरबानी से

भले ही कहा जा रहा हो कि 15 सितंबर से केदारनाथ और हेमकुंड साहिब के लिये हेली सेवा शुरू करा दी जाएगी। इसके लिये 10 सितंबर से हेली टिकरों की बुकिंग होने लगेगी, लेकिन मौसम फिलहाल हेली सेवा में सहयोग करने को तैयार नजर नहीं आ रहा।
——————————
अब तक चारधाम पहुंचे यात्री
धाम।                यात्री
यमुनोत्री            5,86,492
गंगोत्री               6,69,214
केदारनाथ        14,82,647
बदरीनाथ।        12,96,324
हेमकुंड साहिब।   2,52,083
कुल                  42,86,760
(नोट: यह आंकड़ा सात सितंबर तक का है)

Global Ganga News

साथियों, Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे। अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो। -संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button