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सिर्फ औली के नंदा देवी स्कीइंग स्लोप को है देश में अंतरराष्ट्रीय मान्यता

Only the Nanda Devi skiing slope in Auli has international recognition in the country

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सिर्फ औली के नंदा देवी स्कीइंग स्लोप को है देश में अंतरराष्ट्रीय मान्यता

वर्ष 2011 में विंटर सैफ गेम्स के लिए विकसित किया गया था औली में यह स्लोप, आठ नंबर टावर के पास 1,350 मीटर लंबा और 40 मीटर चौड़ा है यह दक्षिणमुखी स्लोप, इसके अलावा 10 नंबर टावर के पास भी है एक अन्य स्कीइंग स्लोप, इस पर भी आयोजित होती हैं प्रतियोगिताएं

देहरादून, 8 फरवरी 2026: विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल औली की खूबसूरती अद्वितीय है। यहां दक्षिणमुखी ढलानों पर स्कीइंग के लिए कई स्वाभाविक स्लोप मौजूद हैं। आठ नंबर टावर के पास स्थित औली के नंदा देवी स्कीइंग स्लोप को तो अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली हुई है, जो 1,350 मीटर लंबा और 40 मीटर चौड़ा है। ख़ास बात यह कि अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यह देश का एकमात्र स्कीइंग स्लोप है। वर्ष 2011 में विंटर सैफ गेम्स के दौरान इसे विकसित किया गया था। खिलाड़ियों को इस स्लोप के स्टार्ट प्वाइंट तक पहुंचाने के लिए स्की लिफ्ट और चेयर लिफ्ट की सुविधा उपलब्ध है।

इस स्लोप पर कृत्रिम बर्फबारी के लिए स्नोगन मशीन भी लगी है, हालांकि यह मशीन फिलहाल खराब है। फेडरेशन आफ इंटरनेशनल स्कीइंग (फिस) से मान्यता प्राप्त इस स्लोप पर वर्ष 2011 में साउथ एशियन गेम्स (सैफ) का आयोजन हुआ था। तब इस स्लोप को फिस से दस साल के लिए मान्यता मिली थी, जिसे फिस विशेषज्ञों ने निरीक्षण के बाद वर्ष 2019 में फिर दस साल के लिए बढ़ा दिया। इसके अलावा औली में दस नंबर टावर के पास स्थित पुराने स्कीइंग स्लोप पर भी उत्तर प्रदेश के दौर से ही कई राष्ट्रीय खेल आयोजित होते रहे हैं। यह स्लोप भी लगभग एक किमी लंबा और 40 मीटर से अधिक चौड़ा है है। राष्ट्रीय खेलों के आयोजन को यह स्लोप पूरी तरह से उपयुक्त है।

गौरसों बुग्याल में में भी है खूबसूरत स्कीइंग स्लोप

औली से तीन किमी ऊपर गौरसों बुग्याल में स्थित स्लोप भी स्कीइंग प्रतियोगिताओं के लिए तैयार है। यहां स्कीइंग प्रतियोगिता के लिए कई प्राकृतिक स्लोप मौजूद हैं। औली में बर्फ की कमी के कारण यहां भी एक बार राष्ट्रीय खेल आयोजित किए जा चुके हैं। हालांकि, गौरसों तक पहुंचने के लिए तीन किमी की चढ़ाई पैदल तय करनी पड़ती है। पर्यटन विभाग की ओर से अब गौरसों तक रोपवे विस्तार की कार्ययोजना भी प्रस्तावित की गई है। राष्ट्रीय स्की कोच अजय भट्ट कहते हैं कि यदि गौरसों तक सुविधाओं का विकास होता है तो यहां विश्वस्तरीय स्कीइंग प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का आयोजन आसान हो जाएगा। औली में बर्फ न होने पर भी यहां प्रतियोगिताएं कराई जा सकेंगी, क्योंकि यहां वर्षभर बर्फ मौजूद रहती है।

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