
देहरादून, 8 अक्टूबर 2025: मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सीरप पीने से कई बच्चों की मौत के बाद उत्तराखंड में भी एहतियात बरती जा रही है। प्रदेश में तमिलनाडु में निर्मित कोल्ड्रिफ कफ सीरप की बिक्री पर रोक के बाद अब गुजरात में बनी रेस्पीफ्रेश टीआर कफ सीरप के स्टाक को फ्रीज करने और बिक्री व वितरण पर रोक लगाने के आदेश दिए गए हैं। इसी क्रम में दून अस्पताल प्रशासन ने भी बच्चों को दिए जाने वाले वालरेक्स-डीएक्स सीरप का वितरण रोक दिया है।
रेस्पीफ्रेश-टीआर सीरप में डायएथिलीन ग्लाइकाल की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई है। यह वही जहरीला रसायन है, जो शरीर में जाकर किडनी, लिवर और नर्वस सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और कई मामलों में मौत का कारण भी बनता है। एफडीए ने राज्यभर में अलर्ट जारी करते हुए सभी थोक और खुदरा विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का भौतिक निरीक्षण करने के आदेश दिए हैं। उप औषधि नियंत्रक हेमंत सिंह नेगी ने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उधर, देहरादून के दून अस्पताल ने भी एहतियात के तौर पर वालरेक्स-डीएक्स सीरप का वितरण तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। यह सीरप आमतौर पर सर्दी-खांसी के लिए दिया जाता है, लेकिन हाल के दिनों में इसके दुष्प्रभाव और बच्चों में गंभीर प्रतिक्रियाओं की शिकायतें सामने आई हैं। अस्पताल प्रशासन ने शासन से मिली एडवाइजरी पर अमल करते हुए सीरप के सभी भंडार और वितरण केंद्रों को लिखित निर्देश जारी किए हैं। आमजन से अपील की गई है कि बिना चिकित्सीय सलाह के बच्चों को कोई भी दवा न दें।
जानिए क्या है डायएथिलीन ग्लाइकाल
यह एक औद्योगिक रसायन है, जो दवा निर्माण में गलती या मिलावट के कारण शामिल हो सकता है। यह शरीर में जाकर गुर्दे, यकृत और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। इसकी अधिक मात्रा घातक होती है। अपील है कि यदि घर में रेस्पीफ्रेश-टीआर या ऐसी कोई अन्य कफ सीरप मौजूद है तो उसका उपयोग न करें। उसे नजदीकी दवा विक्रेता या एफडीए कार्यालय को लौटाएं।



