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आ गया ‘पहाड़ी.एआइ’, गढ़वाली-कुमाऊंनी का करेगा संरक्षण

'Pahadi.AI' has arrived, will protect Garhwali-Kumaoni.

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आ गया ‘पहाड़ी.एआइ’,  गढ़वाली-कुमाऊंनी का करेगा संरक्षण

इस वेबसाइट के माध्यम से किसी भी भाषा के प्रश्नों का गढ़वाली में पा सकते हैं उत्तर, लंदन में एआइ विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत रहे उत्तराखंड के दो युवाओं ने किया इसे तैयार, लंबे समय से की जा रही थी इसकी जरूरत महसूस

देहरादून, 16 नवंबर 2025:  जब धाराप्रवाह गढ़वाली, कुमाऊँनी व जौनसारी बोलने वाली पीढ़ी धीरे-धीरे अवसान की ओर हो, तब शिद्दत के साथ यह बात महसूस की जा रही थी कि कुछ ऐसा हो, जो लोकभाषाओं को बचाने के लिए संजीवनी का काम करे। उत्तराखंड के दो आईटी पेशेवर युवाओं ने यही किया है। लंदन में एआई विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत रहे इन इंजीनियरों ने ‘पहाड़ी.एआइ’ नाम से एक ऐसी वेबसाइट विकसित की है, आने वाले समय में लोकभाषाओं को नवजीवन देने में सहायक सिद्ध होगी। यह पहली वेबसाइट है, जिसमें आप एक क्लिक के माध्यम से चैट जीपीटी की तरह हिंदी, अंग्रेजी या दुनिया की किसी भी भाषा में अपने प्रश्न पूछकर गढ़वाली-कुमाऊंनी में उसका उत्तर पा सकते हैं।

गढ़वाली-कुमाऊंनी बोली के संरक्षण और संवर्धन में योगदान देने के लिए तैयार किया गया संभवतः यह विश्व का पहला एआइ है, जो किसी बोली का संरक्षण करने में सक्षम है। इस माडल को वैश्विक स्तर में अपनाये जाने से अनगिनत भाषाओं को नया जीवन मिल सकता है। अब इसमें गढ़वाली-कुमाऊंनी समेत अन्य पहाड़ी बोलियों को शामिल करने की योजना है। हरिद्वार रोड स्थित होटल एमजे रेजिडेंसी में रविवार को आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने वेबसाइट का शुभारंभ कर युवाओं के नवाचार की सराहना की। उन्होंने कहा कि गढ़वाली-कुमाऊंनी बोली के संरक्षण और संवर्धन के लिए इन एआइ इंजीनियरों का कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वेबसाइट विकसित करने वाले उत्तरकाशी निवासी आदित्य नौटियाल और श्रीनगर निवासी सुमितेश नैथानी ने बताया कि वह लंदन में एआइ विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत रहे हैं। करीब दो साल पहले उन्होंने उत्तराखंड की गढ़वाली और अन्य बोली-भाषाओं के प्रचार के लिए एक एआइ वेबसाइट विकसित करने का विचार बनाया। इसके बाद वापस होकर उन्होंने गाव-गांव में पहुंचकर स्थानीय बोलियों, उच्चारणों, ध्वनियों और भाषाई पैटर्न का गहन अध्ययन किया, जिसमें करीब डेढ़ वर्ष का समय लगा। इस कार्य में उनके साथ डा. अदिति नौटियाल भी शामिल हुईं, जो अब पहाड़ी.एआइ क्रिएटिव की हेड हैं।

कार्यक्रम में मौजूद हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति के प्रतिनिधि प्रो. मोहन पंवार ने कहा कि मातृभाषा गढ़वाली और उत्तराखंड की अन्य
बोली-भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन में यह एआइ वेबसाइट कारगर साबित होगी। लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि नई तकनीक नई पीढ़ी को अपनी बोली से जुड़ने में मददगार साबित होगी। समारोह में शिक्षाविद डा. नंद किशोर हटवाल, प्रो. प्रभाकर बडोनी, डा. विजयकांत पुरोहित, कीर्ति नवानी, डा. ईशान पुरोहित, राजू गुसाईं, रामचरण जुयाल, सोहन चौहान, कविलाश नेगी, गणेश खुगशाल गणी आदि उपस्थित रहे।

इस तरह करें वेबसाइट का उपयोग

– https://pahadi.ai पर निःशुल्क लाग-इन करें।
– चैट करें, बटन दबाएं, चैट जीपीटी जैसा इंटरफेस खुलेगा।
– माइक्रोफोन से बोलें या टेक्स्ट बार में अपना प्रश्न लिखें।
– हाड़ी.एआइ पहाड़ी बोली में जवाब देगा, जो आपकी स्क्रीन में दिखेगा।
– स्पीकर बटन से उत्तर को आवाज में सुना जा सकता है।

Global Ganga News

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