कहीं आप नकली घी तो नहीं खा रहे… ऐसे करें पहचान

देहरादून, 8 अक्टूबर 2025: त्योहारों की रौनक के बीच मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। उत्तराखंड में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने नकली घी, मिल्क पाउडर और डेयरी उत्पादों की बड़ी खेप पकड़कर मिलावटखोरी के नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। ऋषिकेश, विकासनगर और भगवानपुर में पकड़े गए उत्पादों में गुणवत्ता प्रमाणपत्र और एफएसएसएआइ लेबल नहीं मिले। आशंका जताई जा रही है कि ये उत्पाद बाहरी राज्यों से अवैध रूप से सप्लाई किए जा रहे थे।
त्योहारी सीजन में मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए एफडीए की टीमें प्रदेशभर में सक्रिय हैं। मंगलवार को विकासनगर के दर्रारीट में खाद्य सुरक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने बाहरी राज्यों से आने वाले संदिग्ध खाद्य पदार्थों की जांच की। विकासनगर, हरबर्टपुर और सहसपुर में कई प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण कर खुले पनीर के दो नमूने जांच के लिए भेजे गए।
भगवानपुर के बालेकी यूसुफपुर गांव में जांच के दौरान एक वाहन से बिना मानक व लेबलिंग वाले डेयरी उत्पाद पकड़े गए। उत्पादों को तुरंत जब्त कर वाहन चालक व सप्लायर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। ऋषिकेश में भी टीम ने पांच कुंतल क्रीम, 35 किलो घी और 50 किलो स्किम्ड मिल्क पाउडर से भरा वाहन पकड़ा। उत्पादों के पास गुणवत्ता प्रमाणपत्र नहीं थे।
ऐसे करें असली-नकली घी की पहचान
- पिघलाने पर सुगंध: असली घी गर्म करने पर हल्की खुशबू देता है, जबकि नकली घी से रासायनिक गंध आती है।
- फ्रिज टेस्ट: घी को फ्रिज में रखकर देखें, असली घी जमने के बाद एक समान रहता है, नकली घी पर परतें दिखने लगती हैं।
- पानी टेस्ट: एक चम्मच घी को गर्म पानी में डालें, असली घी ऊपर तैरता है, जबकि नकली नीचे बैठ जाता है।
- आयोडीन टेस्ट: प्रयोगशाला में आयोडीन से जांचने पर वनस्पति तेल वाले घी का रंग नीला पड़ जाता है।
- लेबल जांच: हमेशा एफएसएसएआइ नंबर और मैन्युफैक्चरिंग कंपनी का नाम जांचें। बिना लेबल वाला घी कभी न खरीदें।
त्योहारी सीजन में मिलावट से बचने के 5 जरूरी टिप्स
- ब्रांडेड पैकिंग ही खरीदें, खुले उत्पादों से बचें।
- मिठाई या मावा खरीदते समय रंग और गंध जांचें, चिपचिपापन या केमिकल जैसी गंध मिले तो न खरीदें।
- रसीद लें, ताकि शिकायत की स्थिति में सबूत हो।
- एक ही दुकान से भारी मात्रा में खरीदारी न करें, पहले ट्रायल लें।
- संदेह हो तो नमूना स्थानीय खाद्य सुरक्षा कार्यालय में दें, शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है।
जनता से अपील
एफडीए ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि किसी भी उत्पाद को खरीदते समय पैकेजिंग, लेबलिंग, निर्माण तिथि और एफएसएसएआइ नंबर जरूर जांचें। संदिग्ध वस्तु या विक्रेता की सूचना तुरंत एफडीए हेल्पलाइन या स्थानीय कार्यालय को दें।
सरकार की सख्ती
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने प्रयोगशालाओं को निर्देश दिए हैं कि सभी सैंपलों की जांच शीघ्र की जाए, ताकि दोषियों पर तत्काल कार्रवाई हो सके।




