15 साल में कराए एससी-एसटी एक्ट के 16 मुकदमे, लिया लाखों रुपये मुआवजा
अलीगढ़ के एक परिवार ने 15 साल में दर्ज कराए एससी-एसटी के 16 मुकदमे, सच्चाई खोज रही आयोग की टीम

अलीगढ़, 24 सितंबर 2025 : उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के इगलास क्षेत्र का हस्तपुर गांव इन दिनों सुर्खियों में है। वजह है एक ही परिवार की ओर से पिछले 15 वर्षों में एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज कराए गए 16 मुकदमे। आरोप है कि परिवार ने इन मुकदमों के जरिये लाखों रुपये मुआवजे के रूप में हासिल किए। सच्चाई क्या है, यह जानने के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की टीम मंगलवार को गांव पहुंची। डीआइजी सनमीत कौर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति ने पहले सर्किट हाउस में डीएम, एसएसपी और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों से बातचीत की, फिर गांव जाकर करीब छह घंटे तक पड़ताल की। ग्रामीणों और आरोपित परिवार, दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए।
हस्तपुर गांव में रहने वाले विष्णु का परिवार वर्ष 2010 से अब तक एससी-एसटी एक्ट से जुड़े कुल 16 मुकदमे दर्ज करा चुका है। समाज कल्याण विभाग के अनुसार परिवार को अब तक 13 लाख रुपये मुआवजा मिला है, जबकि आयोग के पास 46 लाख रुपये वसूलने की शिकायत थी। टीम ने इस अंतर पर हैरानी जताते हुए दोबारा जांच का आदेश दिया।
गांव में माहौल दो हिस्सों में बंटा दिखा। विष्णु और उसके परिजनों ने आयोग से सुरक्षा मांगी, उनका कहना है कि मुकदमों की वजह से उन्हें जान का खतरा है। दूसरी ओर, प्रधान पति बबलू और कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि परिवार झूठे मुकदमे दर्ज कराकर उन्हें परेशान कर रहा है। 2017 में भी प्रशासन ने आयोग को रिपोर्ट भेजकर इस परिवार पर एक्ट के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। हालांकि आयोग ने तब रिपोर्ट खारिज कर दी थी। अब दोबारा जांच शुरू होने से गांव में फिर से हलचल मच गई है।
एससी-एसटी एक्ट के मुकदमों में मुआवजा प्रावधान
- पहली किस्त: एफआईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज होने के बाद तुरंत 25% से 30% राशि दे दी जाती है।
- दूसरी किस्त: चार्जशीट दाखिल होने के बाद 50% राशि दी जाती है।
- अंतिम किस्त: जब आरोपी दोषी साबित हो जाता है, तो बाकी 25% राशि मिल जाती है।
- साधारण चोट पर : ₹85,000
- गंभीर चोट/हड्डी टूटने पर : ₹1,25,000
- सार्वजनिक स्थान पर अपमान/जातिसूचक गाली पर : ₹1,00,000
- बलात्कार या हत्याः ₹8.25 लाख तक
- मारपीट या छेड़खानीः ₹2 से ₹3 लाख तक



