भालू का आतंक

रुद्रप्रयाग में गुलदार के साथ भालू की भी दहशत, ड्रोन से हो रही निगरानी

In Rudraprayag, there is fear of bear along with leopard, surveillance is being done through drone

खबर को सुनें


रुद्रप्रयाग में गुलदार के साथ भालू की भी दहशत, ड्रोन से हो रही निगरानी

कैमरा ट्रैपिंग से भी रिकार्ड किए जा रहे भालू के मूवमेंट

रुद्रप्रयाग, 16 सितंबर 2025: रुद्रप्रयाग के ग्रामीण क्षेत्रों में गुलदार के बाद अब भालू की बढ़ती गतिविधियों से स्थानीय लोग दहशत में हैं। आबादी वाले इलाकों में भालू के लगातार आने से मानव-भालू संघर्ष का खतरा बढ़ गया है। इस समस्या से निपटने के लिए, वन विभाग ने तकनीकी साधनों का सक्रिय उपयोग शुरू कर दिया है।
ड्रोन कैमरों से निगरानी: वन विभाग ने भालू-जागरूकता सप्ताह के तहत ड्रोन कैमरों की मदद से संवेदनशील ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भालुओं की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। ड्रोन के जरिए भालू के आवागमन मार्गों की पहचान की जा रही है, ताकि संभावित खतरों वाले क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई जा सके।
कैमरा ट्रैपिंग का उपयोग: ड्रोन के अलावा, कैमरा ट्रैपिंग तकनीक से भी भालू के मूवमेंट को रिकॉर्ड किया जा रहा है। इससे वन विभाग को उनकी गतिविधियों की सटीक जानकारी मिल रही है, जो भविष्य की रणनीति बनाने में मदद करेगी।
जागरूकता अभियान: प्रभागीय वनाधिकारी रजत सुमन ने बताया कि ड्रोन से मिली सूचनाओं के आधार पर ग्रामीणों को सचेत किया जा रहा है। साथ ही, “क्या करें – क्या न करें” थीम पर आधारित जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिसमें लोगों को भालू से बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं।
वन विभाग का यह तकनीकी प्रयोग काफी कारगर साबित हो रहा है। पिछले कुछ दिनों में भालू से जुड़ी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी देखी गई है, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।

Global Ganga News

साथियों, Globalganga.com के मंच पर आपका स्वागत करते हुए हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह ऐसा मौका है, जब हम भी वेब पोर्टल की भीड़ में शामिल होने जा रहे हैं, इस संकल्प के साथ कि भीड़ का हिस्सा होते हुए भी हमेशा भीड़ से अलग दिखने का प्रयास करेंगे। हम चाहते हैं कि उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं का देश-दुनिया में प्रसार हो, उत्तराखंड की बोली-भाषाएं समृद्ध हों और उन्हें स्वतंत्र पहचान मिले, यहां आध्यात्मिक पर्यटन एवं तीर्थाटन का विकास हो …और सबसे अहम बात यह कि इस सब में हमारी भी कुछ न कुछ भागीदारी अवश्य रहे। साथ ही एक विनम्र आग्रह भी है कि अपने कीमती सुझावों से समय-समय पर अवगत कराते रहें। ताकि सुधार की प्रक्रिया निरंतर गतिमान रहे। अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा बनाये रखें। यही भरोसा समाज में संवाद की बुनियाद मजबूत करने का आधार बनेगा। इन्हीं शब्दों के साथ आइये! कामना करें कि- ‘सबके हृदय में सर्वदा संवेदना की दाह हो, हमको तुम्हारी चाह हो, तुमको हमारी चाह हो। -संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button